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बुधवार, 7 अक्टूबर 2009

कैसे कह दें कि ..!!!

कैसे कह दें कि तुमसे मुझे प्यार नही ,

होंठ बोले ''हाँ '' दिल करबैठा इकरार कहीं ''


मुद्द्त्तों से तरसती रही जिनको आँखें ,

पास आकर वो कर दे न इंकार कहीं ।


दिल की उमंगों की लहर तेज थी;

लगने लगा ,हो न जाए मझधार कहीं ।


''कमलेश ''न उठाओ पर्दे अपने ,

देखने लग जाए न दुनिया आर -पार कहीं ॥